Mere Marz Ki Har Dawa Hai Tu | Soulful Fusion Qawwal
Original Lyrics –
मैं तुझे रोज़ देखूँ क़रीब से,
मेरे शौक़ भी हैं अजीब से।
मेरी आँखों में है बेख़ुदी,
मेरे ख़्वाब हैं कुछ अजीब से।
तेरी चौखट पे दिल को रख दिया,
अब मुझे और क्या नसीब चाहिए।
तेरी नज़रों ने जो छुआ मुझे,
अब मुझे और क्या क़रीब चाहिए।
ना कोई मन्नत, ना कोई इल्तिजा,
बस तेरा साथ मेरे नसीब में।
मैंने दुनिया से तुझको माँगा नहीं,
मैंने तुझको ही माँगा रब से।
मेरे हर मर्ज़ की दवा हो तुम,
फिर क्या माँगूँ किसी ताबीज़ से।
मेरे हर मर्ज़ की दवा हो तुम,
फिर क्या माँगूँ किसी ताबीज़ से।
मेरी साँसों में तेरा ज़िक्र रहे,
मुझे मतलब नहीं फिर सब से।
तेरे इश्क़ में जो सुकूँ मिला,
वो मिला ना किसी तरकीब से।
तेरी ख़ामोशी भी ग़ज़ल लगे,
तेरी बातें कोई तराना हैं।
तू जो बैठे कभी क़रीब मेरे,
वक़्त जैसे वहीं ठहर जाना है।
मेरे हर ख़्वाब की वजह हो तुम,
मेरी चाहत भी, मेरा नसीब भी।
मेरी हर साँस की दुआ हो तुम,
मेरे दिल के सबसे क़रीब भी।
मेरे हर मर्ज़ की दवा हो तुम,
फिर क्या माँगूँ किसी ताबीज़ से।
मेरे हर मर्ज़ की दवा हो तुम,
फिर क्या माँगूँ किसी ताबीज़ से।
मैं तुझे रोज़ देखूँ क़रीब से,
मेरे शौक़ भी हैं अजीब से।
मेरी आँखों में है बेख़ुदी,
मेरे ख़्वाब हैं कुछ अजीब से।
मेरे हर मर्ज़ की दवा हो तुम,
फिर क्या माँगूँ किसी ताबीज़
-Vinit
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