
Lyrics _Vinit
कोई ऐसा अहल-ए-दिल हो
जिसे सिर्फ़ मेरी आरज़ू हो
अगर खो जाऊँ मैं कहीं
तो सिर्फ़ मेरी जुस्तुजू हो
मैं उसके ज़ेहन-ओ-दिल में
कुछ इस तरह समा जाऊँ
वो ज़ुबाँ जब भी खोले
सिर्फ़ मेरी गुफ़्तगू हो
तू ही मेरी आरज़ू हो
तू ही मेरी जुस्तुजू हो
मैं जहाँ भी जाऊँ जानाँ
तू ही मेरे रूबरू हो
तू ही मेरी आरज़ू हो
तू ही मेरी जुस्तुजू हो
तेरी आँखों में ठहर जाऊँ
जैसे शामों में कोई ख़ुशबू
तू मुझे महसूस करता रहे
मैं दिखाई दूँ न दूँ
तेरी धड़कन में उतर जाऊँ
बनके कोई मीठी-सी धुन
तू ख़ामोश भी अगर बैठे
फिर भी होती रहे गुफ़्तगू
तू ही मेरी आरज़ू हो
तू ही मेरी जुस्तुजू हो
मैं जहाँ भी जाऊँ जानाँ
तू ही मेरे रूबरू हो
तू ही मेरी आरज़ू हो
तू ही मेरी जुस्तुजू हो
इश्क़ में फ़ासला कैसा
रूह का रूह से वास्ता हो
तू जहाँ भी रहे दुनिया में
दिल को बस तेरा रास्ता हो
मैं तुझमें यूँ फ़ना हो जाऊँ
मेरा मुझमें कुछ न बाकी हो
मेरी हर साँस तेरी अमानत
हर दुआ में बस तू ही तू हो
ना कोई शर्त हो इश्क़ में
ना कोई सवाल-ओ-जवाब हो
मैं तेरा नाम लिए जाऊँ
और यही मेरा हिसाब हो
तू मिले तो मुकम्मल मैं
तू न हो तो तेरी आरज़ू हो
कोई ऐसा अहल-ए-दिल हो
जिसे सिर्फ़ मेरी आरज़ू हो
अगर खो जाऊँ मैं कहीं
तो सिर्फ़ मेरी जुस्तुजू हो
मैं उसके ज़ेहन-ओ-दिल में
कुछ इस तरह समा जाऊँ
वो ज़ुबाँ जब भी खोले
सिर्फ़ मेरी गुफ़्तगू हो
आरज़ू हो
जुस्तुजू हो
हर तरफ़ तू
सिर्फ़ तू ही तू हो